दुनियाभर में अशांति का दौर

जल,थल के साथ आकाश भी सुरक्षित नहीं

डॉ. संदीप सिंहमार।

वरिष्ठ लेखक एवं समसामयिक मामलों के जानकार।

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वैश्विक महामारी कोविड-19 की शुरुआत से ही दुनिया भर में अशांति का दौर चल रहा है। तब इस अशांति का कारण कोरोनावायरस था, लेकिन पिछले दो वर्षों से शांति भंग है, उसकी वजह वैश्विक महामारी नहीं बल्कि विश्व के देशों के प्रमुखों का आपस का अहं है। इसी अहं की वजह से से 2022 से रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है तो दूसरी तरफ 7 अक्टूबर 2023 से इजराइल व फिलीस्तीन समर्थित हमास के बीच जंग चल रही है। कहने को तो यह युद्ध सिर्फ इन चार देशों के बीच चल रहा है। पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से विश्व की महाशक्ति अमेरिका सहित ब्रिटेन व चीन भी इसमें शामिल है। दूसरी तरफ इजराइल में फिलीस्तीन के साथ लगते मुस्लिम देश भी इस युद्ध में अपना हाथ दिखा रहे हैं। अभी रूस-यूक्रेन व इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध रुकने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही इसी बीच ईरान व पाकिस्तान के बीच एक नया विवाद छिड़ गया। ईरान का दावा है कि उसने पाकिस्तान में चरमपंथी समूह ‘जैश अल-अद्ल’ के दो ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। ईरान लंबे समय से इस संगठन पर आरोप लगाता रहा है कि इसके सदस्य सीमा पार करके ईरान में घुसते हैं और उनके सुरक्षाकर्मियों की हत्या करते हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने ईरान की इस कार्रवाई को अवैध क़रार देते हुए कहा कि इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। पाकिस्तान ने यहां तक कहा कि ईरान के इस हमले में उनके दो बच्चों की मौत हो गई है। पाकिस्तान के जिस बलूचिस्तान इलाके में ईरान ने कार्रवाई की है, उसकी सीमा ईरान व अफगानिस्तान से लगती है। बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक ऐसा इलाका है, जो सबसे बड़ा प्रांत होते हुए भी सबसे ज्यादा गरीबी के दौर से गुजर रहा है। आय के संसाधन सबसे ज्यादा होने के बावजूद भी जनसंख्या कम है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाक़े में ईरान के मिसाइल हमले की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल है। दोनों ही एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ऐसा युद्ध जैसे हालातो में हमेशा होता आया है। लेकिन इसमें भी सच्चाई है कि पाकिस्तान के चरमपंथी समूह ‘जैश अल-अद्ल’ के लड़ाके वर्षों से ईरान की सीमा में घुसकर हमला करते आए है,जिसकी जिम्मेदारी भी समय-समय पर ली गई है। सबसे बड़ी सोचने की बात यह है कि भारत से अलग होकर जब पाकिस्तान अलग देश बना तो सबसे पहले एक देश के रूप में मान्यता देने वाला ईरान ही है। इन दोनों देशों के बीच हमेशा लव एंड हेट के संबंध रहे हैं। ईरान के साथ एक लंबी सीमा लगने के बावजूद भी दोनों देशों के बीच अब तक कोई सीमा विवाद तो नहीं है, लेकिन तनाव जरूर होता रहता है ईरान का यही आरोप है कि पाकिस्तानी चरमपंथी समय पर उनके देश में घुसकर आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए अमेरिका ने 2019 में पाकिस्तान के चरमपंथी समूह ‘जैश अल-अद्ल’ को आतंकवादी संगठन घोषित किया। कुछ भी हो पाकिस्तान वह देश है जो खुद अपने ही बनाए जाल में हमेशा फसता रहा है। आतंकवादियों के लिए सबसे सुरक्षित देश पाकिस्तान माना जाता है। ओसामा बिन लादेन के उदाहरण से ही समझ लिया जाए। जब लादेन को अमेरिका पूरी दुनिया में ढूंढ रहा था। उस वक्त ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में शरण दिया हुआ था। आखिर अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था। हालांकि ईरान में पाकिस्तान के बीच अभी जंग का ऐलान नहीं हुआ है। होना भी नहीं चाहिए, क्योंकि जंग किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। हर किसी समस्या को बातचीत के द्वारा सुलझाया जा सकता है। पर वर्तमान हालातों के बीच बलूचिस्तान के लोग सहमे हुए हैं। पहले से ही गरीबों की दहलीज पर खड़े इन लोगों को सबसे ज्यादा अपनी रोजी-रोटी की चिंता सा रही है। दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन व इज़रायल-फलीस्तीन में युद्ध चल ही रहा है। युद्ध में शामिल देश की जनता के मन में डर होना स्वाभाविक बात है। लेकिन जिन देशों में किसी भी प्रकार के कोई जंग नहीं है, वहां की जनता भी प्रत्यक्ष रूप से भयभीत है। क्योंकि ऐसा कोई दिन ही बीतता हो जब कोई देश किसी दूसरे देश को धमकी ना देता हो। पिछले दिनों रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उत्तरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात होने के बाद आधी दुनिया सोचती रही की सीक्रेट मीटिंग के बाद आखिर होगा क्या? उत्तरी कोरिया ऐसा देश है,जिसका मुखिया कभी भी किसी भी प्रकार का निर्णय ले सकता है। वह न तो किसी भी महाशक्ति से डर रहा और न ही यूनोओ जैसे संगठन से। यहां यह कहना भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वर्तमान के इस भयानक दौर में यूनाइटेड नेशन देश की सुरक्षा परिषद से किसी भी देश पर कोई असर नहीं है। जहां युद्ध चल रहा है, उसे यूएनओ रोक नहीं पा रहा है। यदि भविष्य में कोई इस जंग में कूदता है तो उसे रोकना तो और भी असंभव कार्य हो जाएगा। पर 1945 की संयुक्त राष्ट्र की जेनेवा संधि के अनुसार जब भी पूरे विश्व में किन्ही भी देशों के बीच युद्ध होगा तो उनमें बीच-बचाव करने का कार्य यूनाइटेड नेशन करेगा, ऐसा कहा गया था। इसके अलावा पांच देश वीटो पावर के तौर पर भी शामिल किए गए। पर असली वजह यही है, जिसकी वजह से विश्व में अशांति फैली हुई है। शिक्षा परिषद की बैठक में वीटो पावर देश की आम सहमति ना बन पाना दुनिया भर के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। इन देशों के मन में दुनिया भर में शांति स्थापित करने का जज्बा हो तो यह कोई असंभव कार्य नहीं है। लेकिन यहां इस काम को भी नाक का सवाल बना लिया गया है। कोई भी पीछे हटना नहीं चाहता। सभी एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। जब तक इस अहं को नहीं त्यागेंगे, तब तक विश्व में शांति स्थापित नहीं हो सकती। इनके साथ यूनाइटेड नेशन को भी अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए शांति बहाली के प्रयास करने चाहिए। नहीं तो इस अंतरराष्ट्रीय संस्था से भी आम जन का भरोसा उठ जाएगा। जिस तरह मानव अधिकार संगठनों से लोगों का भरोसा गायब हो चुका है। दुनिया भर की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पड़ोसी मुल्कों को एकजुट होकर शांति बहाली की ओर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि जो शांति में है वह युद्ध से हासिल नहीं किया जा सकता।

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