26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण नहीं होता बल्कि  राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता  है 

अधिकांश  राज्यों में प्रदेश के मुख्यमंत्री गणतंत्र दिवस पर स्वयं  तिरंगा न फहराकर  राज्यपाल के प्रदेश स्तरीय  समारोह में ही होते हैं  शामिल 

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी भी राज्यपाल के  गणतंत्र दिवस समारोह में होते थे शामिल — एडवोकेट हेमंत 

चंडीगढ़ —  शुक्रवार  26 जनवरी 2024 को  देश के 75वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में हरियाणा प्रदेश की   81 सब डिवीज़नों  (हालांकि राज्य में  80 उपमंडल है चूँकि भिवानी जिले में  बवानी खेड़ा को आज तक  सब डिवीज़न का   दर्जा प्राप्त नहीं  है ) पर आधिकारिक (सरकारी)  समारोह  आयोजित होंगे  जहाँ महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सभी मंत्रीगण, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष,  राज्य से निर्वाचित  भाजपा सांसद, सत्तारूढ़ गठबंधन  के कई  विधायक और कुछ स्थानों पर  निर्वाचित जिला परिषद अध्यक्ष  राष्ट्रीय ध्वज फहरायेगे. वहीं राज्य के  चार उपमंडलों — नरवाना, बेरी, तावडू और कालांवाली में सम्बंधित एस.डी.एम. (उपमंडलाधीश) ऐसा करेंगे. 

इसी बीच पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने  एक रोचक परन्तु   महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए  बताया कि गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण (FLAG HOISTING)  नहीं किया जाता है बल्कि राष्ट्रीय ध्वज फहराया (FLAG UNFURLING) जाता है. दोनों में अंतर समझाते हुए उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 1947 के दिन देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी  एवं उसी   दिन राजधानी  दिल्ली में  लाल किले पर ब्रिटिश झंडे ( यूनियन जैक) को नीचे उतारकर भारतीय ध्वज (तिरंगे) को  ऊपर चढ़ा कर फहराया गया.  झंडे को नीचे से ऊपर ले जाकर फहराने की इस प्रक्रिया को ध्वजारोहण  कहते हैं  इसलिए 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाता है. वहीं 26 जनवरी 1950 को हमारा  देश गणतंत्र बना और भारत का  संविधान लागू हुआ  इसलिए उस दिन पहले से ऊपर बंधे झंडे को केवल खींचकर फहराया  जाता है. इस प्रकार ध्वजारोहण और राष्ट्रीय ध्वज फहराने में अंतर होता है.

उन्होंने आगे बताया कि बीते कई वर्षों की तरह इस वर्ष  भी  हरियाणा  सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस मनाने के उपलक्ष्य पर ताज़ा  जारी शासकीय पत्र में प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख अर्थात   राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय  द्वारा जिला पानीपत मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और परेड की सलामी लेने के आधिकारिक कार्यक्रम को  प्रदेश स्तरीय (स्टेट लेवल )  समारोह के तौर पर उल्लेख नहीं  किया गया  है हालांकि  26 जनवरी का दिन  भारत के संविधान के लागू होने और भारत देश के रिपब्लिक ( गणतंत्र ) बनने की वर्षगांठ के तौर पर मनाया जाता है. 

सनद रहे   कि 15 अगस्त भारत की स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में  देश के प्रधानमंत्री    लाल क़िले की  प्राचीर पर ध्वजारोहण करते हैं और राष्ट्र को सम्बोधित करते हैं जबकि गणतंत्र दिवस पर  भारत के  राष्ट्रपति  कर्तव्य पथ (पूर्व नाम राजपथ) पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते  हैं और  परेड की सलामी  लेते हैं हालांकि उनका कोई सम्बोधन नहीं होता. इसका अर्थ है कि स्वतंत्रता दिवस पर देश के राजनीतिक प्रमुख / शासनाध्यक्ष अर्थात प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है जबकि गणतंत्र दिवस पर संवैधानिक प्रमुख / राष्ट्राध्यक्ष अर्थात देश के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा   राष्ट्रीय ध्वज फहराने और परेड  की  सलामी की परंपरा चली आ रही है.

 हालांकि हेमंत ने बताया कि भारत के कुछेक  राज्यों में जिनमे हरियाणा  भी शामिल हैं में 26 जनवरी को  गणतंत्र दिवस  पर राज्यपाल के सरकारी  समारोह के अलावा  प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री एवं समस्त मंत्रीगण और अब गत दो वर्षो से सत्तारूढ़ पार्टी के  विधायक द्वारा भी  द्वारा भी राज्य के विभिन्न जिला/उपमंडल  स्तरीय सरकारी समारोहों में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर परेड की सलामी ली जाती  है.

वहीं इसके विपरीत देश के अधिकांश प्रदेशो  में आज भी जैसे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में  केवल भारत के राष्ट्राध्यक्ष अर्थात महामहिम राष्ट्रपति महोदय ही राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं उसी  तर्ज पर उन राज्यों में मुख्य सरकारी समारोहों में वहां के  राज्यपाल ही  राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और परेड की सलामी लेते हैं जबकि सम्बंधित प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं किसी जिले में तिरंगा न फहराकर राज्यपाल के प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में ही गेस्ट ऑफ़ हॉनर के तौर पर शामिल होते है. 

इस आशय में हेमंत ने एक रोचक जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर, 2001 से मई, 2014 तक अर्थात जब तक देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  गुजरात प्रदेश   के मुख्यमंत्री रहे थे तब तक वह हर वर्ष 26 जनवरी  गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर गुजरात प्रदेश के राज्यपाल के समारोह में ही उपस्थित  रहते  थे.

उनके आगे बताया कि भारत सरकार द्वारा  वर्ष 1974 में जारी एक सरकारी पत्र अनुसार देश के सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को अपने  अपने प्रदेशों में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन ही ध्वजारोहण करने की अनुमति प्रदान की गई थी.  वर्ष 1974 से पहले हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी अर्थात दोनों  राष्ट्रीय दिनों के उपलक्ष्य पर देश के राज्यों में आयोजित होने वाले मुख्य सरकारी समारोह में केवल महामहिम राज्यपाल ही क्रमशः ध्वजारोहण करते थे एवं राष्ट्रीय ध्वज फहराते  थे. तमिलनाडु के तत्कालीन  मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने आज से पचास वर्ष पूर्व  फरवरी, 1974 में  भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से आह्वान किया था कि  जिस प्रकार देश के प्रधानमंत्री हर वर्ष 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस को लाल किले पर ध्वजारोहण करते  है, वैसे ही प्रदेशों के मुख्यमंत्री को भी अपने अपने राज्यों में ध्वजारोहण करने की अनुमति  मिलनी चाहिए जिसके बाद भारत सरकार ने एक सरकारी पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर प्रदेशों में  राज्यपाल राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे जबकि  15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री प्रदेशों में ध्वजारोहण करेंगे.

THANKS & WARM REGARDS,



HEMANT KUMAR

M.A.(Pub Admn) LL.B

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