बढ़ रहे छात्रों के सुसाइड मामलों पर भगत सिंह फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेनू कादियान के विचार व अभिभावकों को संदेश….

बढ़ रहे छात्रों के सुसाइड मामलों पर भगत सिंह फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेनू कादियान के विचार व अभिभावकों को संदेश….

हर घंटे एक विद्यार्थी आत्महत्या के लिए मजबूर- रेनू कादियान, राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह फाउंडेशन

विद्यार्थियों पर पड़ने वाला तीन तरह का दबाव उन्हें आत्महत्या की तरफ ले जा रहा है। अगर कामयाब नहीं हुए तो मित्र मंडली क्या कहेगी, अभिभावक क्या सोचेंगे और करियर तो बीच में ही रह गया। इस बात से पैदा होने वाला तनाव रोजाना औसतन 30 विद्यार्थियों की जान ले रहा है। अधिकांश राज्यों में ऐसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। पिछले कुछ साल से , हर साल देखे तो औसतन 9,474 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है । उसके बाद भी यह संख्या कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ती ही जा रही है। पिछले साल भी देश में करीब 11 हजार विद्यार्थी असहनीय दबाव और डिप्रेशन के चलते दुनिया को अलविदा कह गए।

16 से 18 साल वाले विद्यार्थी ज्यादा दबाव में

विभिन्न तरह के शोध और मनोचिकित्सकों की मानें तो तीन तरह का दबाव, जो उनके आसपास ही रहता है, उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर करता है। धीरे-धीरे यह दबाव डिप्रेशन में बदलता जाता है। इस तरह के लक्ष्ण ज्यादातर 16 से 18 वर्ष और उससे उपर की आयु वाले विद्यार्थियों में देखे गए हैं। इनमें स्कूल-कालेज के छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे प्रतिभागी शामिल हैं। राजस्थान के कोटा में JEE और NEET की तैयारी करने वाले कई छात्र-छात्राओं द्वारा कथित तौर से आत्महत्या किए जाने के पीछे बहुत हद तक ये तीन कारण देखने को मिले हैं।

कठोर कदम उठाने की आखिर क्या है वजह

मित्र मंडली, करियर और अभिभावक, यह तीन तरह का दबाव, जो एक साथ चलता रहता है, हर किसी को नजर नहीं आता। इससे पीड़ित विद्यार्थी जब स्कूल-कालेज में होता है तो वह अंदर ही अंदर इस दबाव को बढ़ाता जाता है। इसके बाद अभिभावकों की बारी आती है। हालांकि सभी अभिभावक इस तरह का दबाव नहीं डालते हैं कि अगर बच्चा सफल नहीं हुआ तो सब खत्म हो जाएगा। वे अपने बच्चों को प्रोत्साहन देते हैं।

लेकिन कई बार बच्चों को किसी तरह से जैसे, पड़ोसी द्वारा, रिश्तेदार से या अपने किसी दोस्त के मां-बाप से बहुत कुछ पता चल जाता है। उसके मम्मी-पापा उसे लेकर क्या सोचते हैं। उसकी पढ़ाई लिखाई के लिए लोन लिया है या जमीन बेच दी है, जैसी बातें जब उसे मालूम पड़ती हैं तो वह दबाव में आ जाता है। इसके बाद वह पहले से कहीं ज्यादा मेहनत करने लगता है, लेकिन वही दबाव उसे घेरे रहता है। नतीजा, वह दबाव बाद में उसे आत्महत्या तक पहुँचा देता है। तीसरा, करियर में लक्षित सफलता नहीं मिलती है तो भी विद्यार्थी राह भटक जाते हैं।

रेनू कादियान का कहना है कि विद्यार्थियों पर पड़ने वाले इस दबाव को सभी नजरअंदाज कर देते हैं। परिवार और स्कूल प्रबंधन भी इसकी भयावह स्थिति को

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