दास्तान ए अंबाला और वैष्णव की फिसलन का मंचन

अभिनय रंगमंच  द्वारा आयोजित रंग आँगन जो सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार , कला एवं संस्कृति विभाग हरियाणा, हरियाणा कला परिषद एवं संस्कार भारती के तत्वावधान आयोजित किया जा रहा उसके दसवें दिन रियाज़ स्टूडियो में आज़ादी में अम्बाला एक इतिहास पर नाटक  “दास्तान ए अंबाला” किया गया। इससे पहले अतुल लँगाया द्वारा अभिनीत नाटक “वैष्णव की फिसलन” का भी मंचन हुआ । इस नाटक के माध्यम से बताया गया है कि आज़ादी कि पहली लड़ाई में अंबाला का क्या योगदान था और आज़ादी की पहली लड़ाई की चिंगारी अंबाला से फूटी ना कि मेरठ से । 
इस नाटक का पहला मंचन अंबाला में किया गया था । अभिनय रंगमंच के कलाकारों ने इस नाटक को तैयार किया है । इस नाटक का लेखन यशराज शर्मा ने किया है , नृत्य संरचना डॉ राखी दूबे और संदीप नागर द्वारा की गई है। सह निर्देशन स्नेहा बिश्नोई द्वारा किया गया है। संगीत साहिल और प्रकाश व्यवस्था निपुण कपूर द्वारा की गई है । 
पहला नाटक वैष्णव की फिसलन’ धार्मिक पाखंड को दर्शाता एक व्यंग है। धर्म के नाम पर अगर किसी चीज की मनाही हो लेकिन उसे करना जरूरी हो तो इन्सान कोई न कोई तरीका ढूँढ लेता है। वो अपने आप को समझाने के ऐसे ऐसे उपाय खोज लेता है कि उन चीजों में भी धर्म और ईश्वर ढूँढ लेता है।
आभिनय रंगमंच के अध्यक्ष मनोज बंसल ने बताया कि इन्हीं नाटकों के साथ रंग आँगन उत्सव आज संपन्न हुआ है । अगले वर्ष और भी बेहतरीन नाटक खेले जाएँगे।

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