चंडीगढ़, 7 अप्रैल : बहुचर्चित डीएलएफ-वाड्रा जमीन सौदे को लेकर दो आईएएस अधिकारी आपस में भिड़ गए। आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने पहले रोबर्ट वढ़ेरा के भूमि सौदे की जांच के संचालन को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद आईएएस अधिकारी संजीव वर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन पर निशाना साधा। हालांकि दोनों ने स्पष्ट रूप से एक दूसरे का नाम नहीं लिया। दोनों नौकरशाहों के बीच यह विवाद अभूतपूर्व नहीं है और पहले यह सरकारी अधिकारियों को शामिल करने की हद तक बढ़ चुका है। आईएएस अधिकारियों के बीच टकराव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल गया है। खेमका के बयान ने सत्ता में बैठे लोगों की ईमानदारी पर सवाल उठाया। अशोक खेमका के बयान में कहा गया है कि वाड्रा-डीएलएफ सौदे की जांच क्यों लंबी चल रही है? एक दशक हो गया है और इंतजार जारी है। ढींगरा आयोग की रिपोर्ट भी धूल फांक रही है। अपराधियों को मौज-मस्ती करने का मौका मिल रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है? सत्ता में बैठे लोगों में संकल्प की कमी? प्रधानमंत्री द्वारा 2014 में राष्ट्र से किए गए वादों का कम से कम एक बार सम्मान किया जाना चाहिए। जवाब में, वर्मा ने उन लोगों पर उंगली उठाई जो दूसरों पर दोष मढ़ते हैं। आईएएस संजीव वर्मा ने जवाब दिया कि लोग अपने दोष छिपाने के लिए दूसरे के दोष गिनाने लगते हैं, ये भूल कर कि ऐसा करने से वो खुद दोष मुक्त या पवित्र नहीं हो जाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए एक कहावत भी लिखी है, औरों को बुढिय़ा सिखविद दे अपनी खाट भीतरी ले।
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