हरियाणा कला परिषद एवं संस्कार भारती के तत्वावधान आयोजित किया जा रहा उसके चौथे दिन बाल भवन में नाटक गांधी गाथा का मंचन हुआ । इस नाटक का निर्देशन और लेखन सौरभ अनंत ने किया। यह नाटक का दसवाँ शो था, इसकी अवधि एक घंटा 20 मिनट थी। यह नाटक वर्कशॉप में तैयार किया गया था। नाटक में वैष्णव जान…, कैसा संत हमारा गांधी…, रघुपति राघव राजा राम…, जैसे कई गीत थे। नाटक में 30 कलाकारों ने मंच पर अभिनय किया। नतर्क के जरिए अहिंसा, उपवास, स्वदेशी, कुटीर उद्योग, आत्म निर्भरता जैसे कई पहलू को मंचित किया गया।नाटक मोहन से महात्मा गांधी बनने की कहानी को दिखाया गया। शुरुआत के दृश्य में दिखाया कि मोहन अपनी दादी से कहता है कि मुझे अंधेरे से डर लगता है, तो दादी उससे कहती है कि जब भी डर और भय का एहसास हो तो भगवान राम का नाम लेना। टैब से मोहन भगवान राम का नाम लेने लगते है। इसके बाद अगले दृश्य में दिखाया कि मोहन बड़े होकर अपने घर वालों से वकालत करने की बात कहकर विदेश जाते है जिससे गांव के लोग उन्हें यह कहकर अपने समाज से अलग करते हैं कि आज तक हमारे समाज में कोई भी समुद्र के पार पढ़ने नही गया। इसके बाद दिखाया कि वे पहली बार केस लड़ रहे थे उस दौरान मोहन कंपकंपा रहे थे। अगले दृश्य में दिखाया कि अफ्रीका में मोहन को ट्रेन से धक्का देते हैं, जिससे उनके स्वाभिमान पर चोट होती है और वहीं गोखले से मिलते हैं और भारत में आकर कई यात्रा और आंदोलन, खादी का बढ़ावा देते हैं और देश आजाद होता है। नाटक के अंतिम दृश्य में महात्मा गांधीं की हत्या दिखाई जाती है । नाटक का संगीत हेमंत देवालकर ने किया । संस्था के सचिव मनीष जोशी ने बताया कि कल नाटक छोड़ो कल की बातें का मंचन किया जाएगा ।
अभिनय रंगमंच द्वारा आयोजित रंग आँगन जो सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार , कला एवं संस्कृति विभाग हरियाणा

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