आर्थिक सर्वे में मिली खुशखबरी! वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश की रिपोर्ट

पाठकपक्ष न्यूज

हिसार, 22 जुलाई : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को बजट (बजट 2024) पेश करने से एक दिन पहले 22 जुलाई सोमवार को लोकसभा में प्री-बजट डॉक्यूमेंट यानि आर्थिक सर्वे 2023-24 पेश कर दिया है। इसके बाद आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2 बजे राज्यसभा में पेश की जाएगी। इससे पहले संसद में पहुंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कल हम जो बजट पेश करेंगे, वो अगले पांच सालों के लिए दिशा और दिशा तय करेगा। ये बजट हमारी अमृतकाल की यात्रा में एक अहम मील का पत्थर है। हमें 2047 तक विकसित भारत के हमारे दृष्टिकोण को हासिल करने की दिशा में प्रेरित करेगा। आर्थिक सर्वे वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग की ओर से तैयार किया जाता है। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार किया जाता है। ये सरकार के आर्थिक प्रदर्शन, बड़े डेवलपमेंट प्रोग्राम और नीतिगत पहलों के सारांश के रूप में काम करता है। आर्थिक सर्वे में देश की इकोनॉमी की पूरी तस्वीर पेश की जाती है। इसमें अर्थव्यवस्था की स्थिति, संभावनाओं और नीतिगत चुनौतियों का विस्तार से ब्यौरा दिया जाता है। इकोनॉमिक सर्वे में बीते वित्त वर्ष के रोजगार, जीडीपी, मुद्रास्फीति और बजट घाटे की जानकारी देने वाले काफी महत्वपूर्ण आंकड़े होते हैं। इस बार का इकोनॉमिक सर्वे मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन की अगुआई वाली टीम ने तैयार किया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे पेश कर दिया है। आर्थकि सर्वे 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ते वर्क फोर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए गैर-कृषि क्षेत्र में 2030 तक सालाना औसतन लगभग 78.5 लाख नौकरियां पैदा करने की जरूरत है। वित्त वर्ष 2023-24 के इकोनॉमिक सर्वे में इकोनॉमी से जुड़ी कई अहम बातें बताई गई हैं। इनमें जीडीपी ग्रोथ, इनफ्लेशन, इंप्लॉयमेंट रेट, फिस्कल डेफिसिट समेत कई डेटा शामिल हैं। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में ग्रोथ 6.5 से 7 फीसदी रहने के आसार हैं। आर्थिक सर्व में सबसे ज्यादा इंतजार चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ के पूर्वानुमान है। बता दें कि 31 जनवरी, 2023 को पेश फुल सर्वे में, एफवाई24 के लिए जीडीपी की ग्रोथ 6-6.8 प्रतिशत के बीच देखी गई थी। इकोनॉमिक सर्वे में कृषि पर फोकस बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। इसमें मेंटल हेल्थ पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। सरकार का जोर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर बढ़ेगा। इस साल एनएचएआई के लिए 33 एसेट्स की बिक्री के लिए पहचान की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि प्राइवेट सेक्टर का प्रॉफिट बढ़ा है, लेकिन इसके मुताबिक रोजगार के मौके नहीं बढ़े हैं। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि कमर्शियल बैंकों और बीमा कंपनियों को बाजार में ज्यादा से ज्यादा पहुंच बनाने के अपने मकसद के साथ ही देश में वित्तीय सोच समझ के मानसिक स्तर को ध्यान में रखना होगा। भारत का वित्तीय क्षेत्र महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, इसलिए इसे वैश्विक और स्थानीय रूप से होने वाले संभावित जोखिमों के लिए तैयार रहना होगा।

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