चार मंजिला भवन निर्माण के विवाद के चलते बिल्डिंग कोड 2017 को निरस्त करने की मांग

पाठकपक्ष न्यूज

हिसार, 30 मई : हरियाणा सरकार के द्वारा पारित आदेश की  अवैध रूप से बनाई गई चार मंजिला इमारतें एचएसवीपी के सेक्टर और अन्य कॉलोनी से गिरा दी जाएंगी। यह हरियाणा स्टेट हुड्डा सेक्टर कनफेडरेशन द्वारा लड़ी गई लंबी लड़ाई की आधी अधूरी जीत है। हरियाणा स्टेट कनफेडरेशन के राज्य संयोजक श्री यशवीर मलिक ने बताया कि 23 फरवरी 2023 को राज्य सरकार ने स्टिल्ट प्लस चार मंजिला इमारत के बनने पर रोक लगा दी थी। परंतु उच्च अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से चार मंजिला इमारतों का निर्माण बड़े शहरों जैसे गुडग़ांव फरीदाबाद पंचकूला हिसार आदि में जारी रहा। अत: इनको गिरने से सेक्टर वासियों को कुछ तो राहत जरूर मिलेगी लेकिन सेक्टर कनफेडरेशन की तो एक ही मांग थी की जल्दी-जल्दी में बनाया गया हरियाणा बिल्डिंग कोड 2017 को निरस्त किया जाए। या इसको पुराने सेक्टरों के ऊपर लागू नहीं किया जाए। अपनी जायज मांग को लेकर हरियाणा स्टेट सेक्टर कनफेडरेशन के अधीन एक बड़ा जन आंदोलन इस स्कीम के विरुद्ध छोड़ा गया। आंदोलन के दौरान पंचकूला, पानीपत, सिरसा, गुडग़ांव, फरीदाबाद और हिसार में बड़े सेक्टर वीडियो की मीटिंग हुई तो सरकार को ज्ञापन सौंपा। पूरे प्रदेश में हस्ताक्षर अभियान चलाकर लगभग 2 लाख हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन माननीय राज्यपाल महोदय को सौंपा गया। विधानसभा में शरद कालीन सेशन के दौरान सरकार ने चार मंजिलों इमारत पर रोक लगाने की घोषणा की। टाउन प्लैनिंग डिपार्टमेंट के डायरेक्टर श्री पी. राघवेंद्र राव के नेतृत्व में तीन सदस्य एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया। जिसने अपनी रिपोर्ट जून 2023 में राज्य सरकार को सौंप दी। परंतु सरकार ने उस पर अभी तक कोई फैसला नहीं किया है और न ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। कनफेडरेशन की इस लंबी लड़ाई में पूर्व सी अध्यक्ष जर्नल वीपी मलिक भी साथ जुड़ गए। अभी तक सरकार ने चार मंजिला इमारत के बनने पर रोक लगाई है। कोड 1917 को निरस्त नहीं किया है, सेक्टर कनफेडरेशन की वही मांग है की बिल्डिंग कोड 1917 को समाप्त किया जाए या उसे सिर्फ नए सेक्टर में या कॉलोनी में ही लागू किया जाए। जिन मकानों के साथ-साथ यह चार मंजिली मार्ट बन गई है उनको भारी नुकसान पहुंचा है। अत: सरकार ने उनको अभी तक कोई उचित मुआवजा नहीं प्रदान किया है। सरकार से मांग है कि उनको अपने किए वायदे के अनुसार उचित मुआवजा प्रदान किया जाए और जब तक यह मांग पूरी नहीं होती स्टेट कनफेडरेशन की लड़ाई कानूनी रूप से भी और मैदानी रूप से भी जारी रहेगी।

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