-पाठकपक्ष डेस्क-
जहां एक और भारत सरकार द्वारा ड़कों और मार्गों की समुचित व्यवस्था करके भारत के गांवों को शहरों के साथ नोड़ा है वहीं दूसरी और एक स्थान से सरे स्थान तक पहुंचने की दूरी में बहुत कमी आई है। यह भारत सरकार की कारात्मक सोच के साथ भारत के कास की और एक नई भोर का प्रारम्भ है। इसी प्रकार भारत के अनेक ज्यों में भी शहर और गांव में सड़कों का ऐसा जाल बिछ गया है जिसने नुष्य के जीवन में विकास को गति दान की है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय मार्गों र अलग से सर्विस लाइन बनाकर जन सुविधाओं में विशेष बढ़ोतरी की है।
जहां मानव कल्याण के लिए नरकार द्वारा विस्तृत मार्गों की अनेक सुविधाएं प्रदान की गई हैं वहीं दूसरी और कुछ लोगों ने अपने निजी लाभ के लिए न सड़कों का अतिक्रमण करके अन्य नोगों को इन सुविधाओं से वंचित करके ख दिया है। यद्यपि नैतिकता और सामाजिकता के साथ साथ सड़क सुरक्षा यमों और विधि अनुसार सड़क के नों और अतिक्रमण नहीं होना चाहिए थापि ऐसा हो रहा है। फुटपाथ केवल दल यात्रियों के लिए आरक्षित होता लेकिन इसका प्रयोग पैदल यात्री नहीं कर पाते क्योंकि वहां पर अनधिकृत रूप अनेक प्रकार का सामान बेचने वाले कब्ज़ा कर लेते हैं। इतना ही नहीं सड़क र सफ़ेद पट्टी से किनारे का स्थान पहिया वाहन चालकों के लिए होता है हां तक बेचने वाले अपने साधन को ड़ा देते हैं। इनमें मुख्य रूप से ऑटो रक्शा, रेहड़ी, बीड़ी सिगरेट, खाद्य पदार्थ
बेचने वाले और अन्य साज सज्जा के साथ साथ अनेक विक्रेताओं के एजेंट होते हैं। इन सड़कों के अतिक्रमण के कारण ही अनेक सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार यदि हम भारत की राजधानी दिल्ली की बात करें तो फुटपाथों पर हुए कब्जों के कारण पैदल यात्री सड़कों पर चलने को विवश हो जाते हैं और मृत्यु को प्राप्त होते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 31 मई तक 205 प्राणघाती सड़क दुर्घटनाओं में 206 राहगीरों की मृत्यु हुई। वहीं, पिछले वर्ष 497 प्राणघाती सड़क दुर्घटनाओं में 504 पैदल चलने वाले लोग मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार सड़कों पर पैदल चलने वाले जितने भी लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौतें हुई हैं। इनमें कुछ सड़क पार करते हुए तो कुछ सड़क किनारे चलते हुए मारे गए। इनमें से काफी संख्या ऐसे लोगों की थी। जो फुटपाथों पर अतिक्रमण होने की वजह से सड़कों पर चलने को मजबूर हुए। यहां उन्हें किसी न किसी गाड़ी ने टक्कर मार दी। जिससे उनकी मौत हो गई। ऐसे में
पूरे भारत में फुटपाथों को पैदल यात्रियों के चलने के लिए साफ होना ही चाहिए। लगभग सभी शहरों में अनाज मंडी, सब्जी मंडी आदि की व्यवस्था है तो ऐसे में शहरों और गांवों में सड़क किनारे खड़े विक्रेताओं को स्वयं नैतिकता के आधार पर नियमानुसार केवल और केवल निर्धारित स्थानों पर ही अपना सामान बेचने जाना चाहिए ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। दूसरी और सरकार को कठोर नियमों का पालन करने की आवश्यकता है।
दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है सड़कों पर अतिक्रमण – चिंता का विषय

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