हिसार, 28 अप्रैल : ओशो सिद्धार्थ फाउंडेशन के तत्वाधान में ओशोधारा मैत्री संघ ने अपने कौशिक नगर स्थित साधना केंद्र में संडे ध्यान का कार्यक्रम आयोजित किया। ओशो धारा साधना केंद्र पर आचार्य गगन ने ब्रह्मनाद ध्यान करवाते हुए कहा कि ब्रह्मनाद ध्यान में शब्दों और ध्वनियों के माध्यम से मन को एकीकृत किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मन को स्थिर करना, चित्त को शांति प्रदान करना और आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया में मदद करना होता है। इस ध्यान का मुख्य उद्देश्य ब्रह्म या अनंत और अद्वितीय सत्य के साथ एकीभाव का अनुभव करना है। ब्रह्मनाद ध्यान में व्यक्ति अपनी आत्मा को ब्रह्म के साथ मिलाकर रहता है और उसे समरसता और पूर्णता की अद्वितीयता का अनुभव होता है। इस प्रकार का ध्यान अक्सर योग और धार्मिक साधनाओं के साथ जुड़ा होता है, जो आत्मा की सांगीतिकता और एकता की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। ध्यान में समर्थ बनने के लिए, व्यक्ति को अपने विचारों को शांति और एकाग्रता की स्थिति में ले जाने का प्रयास करना पड़ता है। विचारों की उपेक्षा और अंतर मन की स्थिति की प्राप्ति ब्रह्मनाद ध्यान के माध्यम से होती है। यह ध्यान व्यक्ति को साक्षात्कार में ले जाने के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान कर सकता है, जिससे उसे अपने आत्मा के साथ एक मेल का अनुभव हो सकता है। ब्रह्मनाद ध्यान का अभ्यास व्यक्ति को समरसता, प्रेम और सच्चाई के साथ जुडऩे का एक अद्वितीय मार्ग प्रदान कर सकता है, जिससे उसे जीवन को समर्थन और समर्पण के साथ जीने का नया दृष्टिकोण प्राप्त हो सकता है। ज्ञात रहे कि कोई भी ध्यान आपको किसी गुरु या प्रशिक्षित आचार्य के निर्देशन में ही करना चाहिए। ओशोधारा मैत्री संघ हर रविवार को सुबह 7 से 9 बजे तक अपने साधना केंद्र कौशिक नगर पर ध्यान के कार्यक्रम का आयोजन करता है, जो कि सभी के लिए नि:शुल्क होता है और प्रशिक्षित आचार्य ही ध्यान का सैशन लेते हैं। ध्यान के बाद ओशोधारा, हरियाणा के संयोजक आचार्य सुभाष ने साधकों को सम्बोधित करते हुए बताया कि ओशोधारा के कार्यक्रम वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रमाणिक है और ध्यान को घर-घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर सप्ताह पूरे देश में ध्यान योग का कार्यक्रम तय किया गया है। ओशोधारा मैत्री संघ हिसार ओशोधारा के प्रथम तल का प्रोग्राम किये हुए साधकों के लिए हिसार के बुधला संत मंदिर में 17 से 19 मई 2024 को सुरति योग करवाने जा रहा है।
आत्मा का संगीत है ब्रह्मनाद ध्यान : आचार्य गगन

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