आज पौष सुदी नवमीं विक्रमी संवत् 2080 शुक्रवार तदनुसार 19जनवरी, 2024 को *पथिक* विषय पर एक विशेष काव्य रचनाः
*पथिक*
जीवन हमारा घणा दुर्लभ है,
जीवन जीणा घणा दुष्कर है।
हमारा देश गत दो वर्षों तक,
परिस्थितियों गई जो गुज़र है।
जीवन पथिक हुए व्यथित है,
कोरोना रहा कठिन सफ़र है।।
कोरोना काल के चिन्ह स्पष्ट,
देखते हैं देशवासियों के मुख।
कोरोना बीमारी ने दिया भय,
जीवन पथिकों को घणा दुख।
हमारा स्वास्थ्य ही नहीं छीना,
छीन्नी है रोजी रोटी दी भूख।।
पथिक पथ में लगा ग्रहण था,
कठिन हुआ करना सहन था।
घणे लोग रोग से आक्रान्त थे,
कई गुना घणा उन्हें भ्रम था।
बीमारी से तबसब चिंतित थे्,
बचना ‘र’ बचाना ही धर्म था।।
ऐसा ही कुछ दिन चलता रहा,
उत्पन्न भयावह स्थिति हो गई।
हिले सर्वपथ के सभी पथिक,
कल्पना तक भी कठिन होई।
कोरोना से घणे से पथिको के,
प्राणों की आहुति तब हो गई।।
हमारे मध्य रहने वाले हमारे,
मित्र, संबंधी, रिश्तेदारों सारे।
कोरोना से ग्रसित देखे हमने,
मौत के मुख के समाये सारे।
भयभीत सब पथिक हो गये,
भय व्याप्त फिरते मारे मारे।।
बचाव ही कोरोना इलाज रहा,
सभी में व्याप्त नित्य डर रहा।
मास्क था जरूरी,दो गज दूरी,
था हर पथिक ही मजबूर रहा।
कोई भी घर पे बाहर से आए,
हरेक हाथ सेनेटाइज करा रहा।।
बीमारी अर दुश्मन छाये रहे थे,
जीवन पथिक घबराये रहे थे।
दोनों मर्म स्थल पे घात लगाए,
भारती पथिकां नै डराये रहे थे।
इम्यून शक्ति गजब भारत की,
सजग पथिकों को बचाये रहे थे।।
कोरोना वैक्सीन खोजी पथिक,
पृथ्वीसिंह’ हर घर रहा पथिक।
हर देशवासी डॉक्टर थे पथिक,
हर भारतवासी था रक्षा पथिक।
रोग को हरा पार हुये थे पथिक,
बल और सुख पाये सब पथिक।
भारतीय पथिक नवण प्रणाम,
भारत माता को नवण प्रणाम।।
©
*कवि पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिश्नोई*
राष्ट्रीय सचिव, जेएसए, बीकानेर,
राष्ट्रीय प्रैस प्रभारी-अखिल भारतीय जीवरक्षा बिश्नोई सभा, अबोहर जिला-फाजिल्का (पंजाब)
वरिष्ठ लेखक, वरिष्ठ पत्रकार, वरिष्ट साहित्यकार,
समाज-सेवक, पूर्व सरपंच सीसवाल,
हॉउस नं. 313, सेक्टर 14 (श्री ओ३म विष्णु निवास) हिसार (हरियाणा)-125001 भारत
फोन नंबर-9518139200,
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