हिसार, 14 अप्रैल : गली-गली, गांव-गांव, शहर-शहर आवारा कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं और अस्पतालों में ऐसे केस बढ़ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए वेटर्नरी यूनिवर्सिटी ने आवारा कुत्तों की फेमिली प्लानिंग शुरू की थी परंतु वह स्कीम कामयाब नहीं हुई। हम अपले दर्शकों व पाठकों से इस समस्या के निपटने के लिए सुझाव लेना चाहेंगे। क्या इनकी फेमिली प्लानिंग फिर से शुरू की जाए या डॉग हाउस स्थापित किए जाएं। आवारा कुत्तों के निर्यात यानि एक्सपोर्ट की संभावना भी कम दिखाई देती है। सरकार इस दिशा मेंं कोई कदम नहीं उठा रही है। इसलिए आपके सुझाव आमंत्रित हैं। सुझाव ऐसे होने चाहिए जिससे पशु के प्रति क्रूरता का व्यवहार न हो सके। पशु के प्रति क्रूरता अपराध की श्रेणी में आता है।
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