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अंतर्मुखी हो अंदर के व्यर्थ के प्रति सजग रह कर ही, उसे खत्म करने का सार्थक प्रयास किया जा सकता है

हम हर पल कुछ न कुछ सोचते रहते हैं, मतलब अंदर विचारों का प्रवाह चलता रहता है। हम उन पर गौर करें तो पाएंगे कि उनमें से ज्यादातर तो व्यर्थ के विचार होते हैं, मतलब उनका कोई सिर पैर नहीं होता और ज्यादा तर उनमें दोहराव होता है, अंदर में एक ही ट्यून बार बार...