एक चपरासी या छोटे अधिकारी बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े घोटाले को अंजाम कैसे दे सकते है : हाईकोर्ट

मृत व्यक्तियों को पेंशन देने के मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पाठकपक्ष न्यूज

चंडीगढ़, 29 मई : हरियाणा में मृत व्यक्तियों (भूतों) को पेंशन देने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने सीबीआई से पूछा कि जिन अधिकारियों और पार्षदों ने मरे हुए व्यक्तियों की पहचान की और उनको पेंशन बांटी, उनके खिलाफ अपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए? हाई कोर्ट ने टिप्पणी में सीबीआई से ये भी पूछा कि क्या एक चपरासी या छोटे अधिकारी बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकते हैं? हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता राकेश बैंस के अधिवक्ता प्रदीप रापडिय़ा ने कहा है कि अधिकारियों को बचाने के लिए हरियाणा पुलिस ने एक रिटायर्ड चपरासी को घोटाले का सूत्रधार बनाकर उसको अरेस्ट किया। इससे लगभग 14 लाख रुपये की रिकवरी करके उसके खिलाफ चालान भी पेश कर दिया। प्रदीप रापडिय़ा के मुताबिक इस मामले में बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा।

यहां है मामला

आरटीआई कार्यकर्ता राकेश बैंस ने एडवोकेट प्रदीप रापडिय़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को हरियाणा में हुए पेंशन वितरण घोटाले की 2017 में जानकारी दी थी। याची ने बताया कि कैग रिपोर्ट के अनुसार पेंशन वितरण में बड़ा घोटाला हुआ। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने ऐसे व्यक्तियों को भी पेंशन बांट दी जो या तो स्वर्ग सिधार चुके थे या पेंशन लेने की योग्यता ही पूरी नहीं करते थे। इस प्रकार सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया।

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