पाठकपक्ष न्यूज, हिसार, 24 मई (इकबाल सिंह उप्पल): 25 मई को होने वाले आम चुनाव के छठे राउंड के मतदान के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक पार्टियों और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों ने हर प्रकार की पूरी ताकत झोंक दी है। बिना मतदाता की राय जाने अपने-अपने दावा पेश किए हैं। ऐसा माहौल बना दिया जैसे एक सीट पर कई-कई उम्मीदवार जीतंगे। इस बार सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और डिजीटल मीडिया भी पिछले कई दिनों से अपनी कलम और माइक लेकर नेताओं के आगे-पीछे
ऐसे मतदाताओं से कुछ सवाल किए तो उनके बड़े तीखे जवाब दिए
सवाल : क्या उम्मीद है इस बार भाजपा गठबंधन पार होगा।
जवाब : ये सिर्फ मोदी जी ही बताएंगे।
सवाल : हरियाणा की दस की दस सीट कौन जीत सकता है।
जवाब : कोई पार्टी नहीं जीत सकती।
सवाल : आप का मुद्दा या मांग क्या है।
जवाब : मंदिर मस्जिद, विश्व गुरु, हिन्दू मुस्लिम और उनके बच्चे, कांग्रेस को मिटाना, भाजपा को हराना मेरे मुद्दे नहीं हैं।
सवाल : तो फिर आपके मुद्दे हैं क्या?
जवाब : बस दो टाइम की रोटी मिल जाए चैन के साथ।
सवाल : मतदान करोगे?
जवाब : जरूर
सवाल : किसको?
जवाब : जिसे में चाहूंगा।
सवाल : आप सीधा जवाब नहीं दे रहे?
जवाब : जवाब सीधा है जी।
नोट : तो ये मतदाता का असली मूड चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार और उनके दावेदार चौकस हो जाएं। जैसे वो सोच रहे हैं कि सब तरफ हरी-हरी घास है। ऐसा बिल्कुल नहीं हैं, चुनाव का परिणाम चौंकाने वाला ही होगा।
मंडराते रहे और पल-पल की कवरेज देते रहे लेकिन मतदाता का मूड जानने में सफल कोई नहीं हो पाया। इसी दौरान बड़ी संख्या मेंं हमारी टीम ने ऐसे मतदातों से संपर्क किया, जिन्होंने ने चुनाव प्रचार से दूरी बनाई रखी। ना किसी रैली में गए ना किसी नेता को घर चाय पर बुलाया ना खुद बुलाने पर भी किसी उम्मीदवार की चाय पीने नहीं गए। लोकसभा का हलका इतना बड़ा होता है कि घर-घर जाकर उम्मीदवार वोट मांग ही नहीं सकता। उम्मीदवार रैली, रोड शो और नुक्कर मीटिंग तक ही सीमित रह जाते हैं। इसलिए बड़ी गिनती में मतदाता चुनाव-प्रचार से बाहर रह जाते हैं।

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