भाजपा-जजपा गठबंधन टूटा, मनोहरलाल ने अपने सभी विधायकों के साथ सीएम पद से इस्तीफा

भाजपा-जजपा गठबंधन टूटा, मनोहरलाल ने अपने सभी विधायकों के साथ सीएम पद से इस्तीफा

नायाब हाथों में प्रदेश की कमान 

चंडीगढ़, 12 मार्च : लोकसभा चुनाव 2024 की सरर्गियां तेज हो चुकी हैं। आज सुबह भाजपा और जजपा का गठबंधन टूट गया वहीं हरियाणा के सीएम मनोहरलाल ने अपने सभी विधायकों के साथ सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। दोपहर बाद मीटिंग बुलाई गई जिसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाने पर मुहर लग गई। अब हरियाणा के नए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी होंगे। वह शाम पांच बजे सीएम पद की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार मनोहरलाल अब करनाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार होंगे।

बता दें कि नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विश्वासपात्र माना जाता है। उनके कहने पर ही कुछ वक्त पहले भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा था। नायब सिंह सैनी सरकार बनाने का दावा करने राजभवन पहुंचे। शाम 5 बजे वो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सैनी मनोहर लाल के करीबी हैं। 27 अक्टूबर 2023 को ही उन्हें हरियाणा भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था। इससे पहले मनोहर लाल ने बीजेपी और जननायक जनता पार्टी का गठबंधन टूटने के बाद मंगलवार सुबह 11.50 बजे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। 

जाट विधायक को दिया जा सकता है डिप्टी सीएम पद

हरियाणा की राजनीति में काफी उथल-पुथल के बाद जेजेपी गठबंधन टूट गया। वहीं हरियाणा का नया सीएम नायब सिंह सैनी को बना दिया गया। दुष्यंत के पार्टी से गठबंधन तोडऩे के बाद डिप्टी सीएम का पद भी खाली हो गया है। सूत्रों के अनुसार चर्चाएं हो रही हैं कि डिप्टी सीएम का पद किसी जाट समुदाय के विधायक को दिया जा सकता है। 

भाजपा ने विपल्व देव को बनाया पर्यवेक्षक

विधायक दल की बैठक में शामिल होने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ और प्रदेश प्रभारी बिप्लब देब चंडीगढ़ पहुंचे। पार्टी ने इन्हें पर्यवेक्षक बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी ने इनका स्वागत किया। बैठक में पर्यवेक्षक अर्जुन मुंडा और तरुण चुघ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी भी उपस्थित थे।

लोकसभा में सीट न देने को लेकर जजपा से बिगड़ी बात

भाजपा लोकसभा चुनाव में दसों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारना चाहती है जबकि जेजेपी ने केवल एक या दो सीट की ही डिमांड की थी। इसलिए गठबंधन टूटा। जेजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला सोमवार को दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले थे लेकिन सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी। वहीं, जेजेपी ने भी दिल्ली में अपने विधायकों की बैठक बुलाई है। यह बैठक पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के   

    आवास पर चल रही है। हालांकि पार्टी के 10 में से 5 विधायक इस बैठक में 

   नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि ये सभी बीजेपी के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं।

ओबीसी समुदाय से आते हैं नायब सैनी  2014 में जीतकर पहुंचे थे विधानसभा

नायब सिंह सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं। पिछले साल 2023 में उन्हें बीजेपी हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विश्वासपात्र माना जाता है। सैनी को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। 1996 में उन्हें हरियाणा बीजेपी के संगठन में जिम्मेदारी दी गई थी। उसके बाद वर्ष 2002 में नायब सैनी अंबाला बीजेपी युवा मोर्चा के जिला महामंत्री बने थे। 2005 में नायब सिंह सैनी भाजपा अंबाला युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्हें बीजेपी हरियाणा किसान मोर्चा का प्रदेश महामंत्री भी बनाया गया। साल 2012 में नायब सैनी का प्रमोशन हुआ और उन्हें अंबाला का जिला अध्यक्ष बना दिया गया। 2014 के विधानसभा चुनाव में नायब सिंह सैनी को नारायणगढ़ से टिकट दिया गया और वह जीतकर विधानसभा पहुंच गए। नायब सिंह सैनी को मनोहर लाल खट्टर के करीबी होने का भी फायदा मिला। वर्ष 2016 में उन्हें खट्टर के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में नायब सिंह सैनी को कुरुक्षेत्र से टिकट दिया गया और वह सांसद बन गए।

 नये सीएम नायब सैनी को 11 सितम्बर 2024 से पहले विधायक बनना जरूरी

चंडीगढ़। कुरुक्षेत्र से लोकसभा सांसद नायब सिंह सैनी के हरियाणा का अगला मुख्यमंत्री बनने के विषय पर  पंजाब एवं हरियाणा  हाईकोर्ट के  एडवोकेट और कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि वर्तमान में नायब सैनी हरियाणा विधानसभा के सदस्य हैं विधायक नहीं हैं, इसलिए वह बगैर विधायक बने अधिकतम  आगामी 11 सितम्बर 2024 अर्थात  6 महीने तक मुख्यमंत्री के पद पर रह सकते हैं। भारत देश के संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए हेमंत ने बताया  उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि कोई मंत्री (मुख्यमंत्री ) जो निरंतर 6 माह की किसी अवधि तक राज्य के विधान-मंडल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा। 

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