25000 करोड़ के बैंक घोटाला मामले में अजित पवार की पत्नी को क्लीन चिट, शरद पवार के पोते को भी बड़ी राहत

25000 करोड़ के बैंक घोटाला मामले में अजित पवार की पत्नी को क्लीन चिट, शरद पवार के पोते को भी बड़ी राहत

नई दिल्ली, 24 अप्रैल : लोकसभा चुनाव से पहले पवार परिवार के लिए अच्छी खबर आई है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 25,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला मामले में डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को भी क्लीन चिट दे दी है। एनसीपी (अजित पवार) ने सुनेत्रा पवार को बारामती लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है, उनका मुकाबला शरद पवार की बेटी व बारामती की वर्तमान सांसद सुप्रिया सुले से है। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। जिसमें कहा गया है कि जरांदेश्वर शुगर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गुरु कमोडिटी से जरांदेश्वर सहकारी चीनी मिल को किराए पर लेने में कोई अवैधता नहीं हुई है। हालांकि, ईडी ने अपने आरोपपत्र में कहा कि गुरु कमोडिटी और जरांदेश्वर शुगर मिल्स ने पट्टे को सही दिखाने के लिए कागजी लेनदेन किया था। मामले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू ने 2020 में एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, लेकिन बाद में अजित पवार और उनके भतीजे रोहित पवार की जांच के लिए इसे मामले को फिर से खोलने के लिए ईओडब्ल्यू अदालत गई। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने इस साल जनवरी में दूसरी रिपोर्ट दायर कर मामले को बंद करने की मांग की, जिसमें कहा गया कि इस मामले में अजित पवार सहित किसी के खिलाफ आगे जांच के लिए कोई सबूत नहीं है। हालांकि अब अजित पवार सत्तारूढ़ महायुति के साथ हैं और राज्य के डिप्टी सीएम भी है। ईओडब्ल्यू की यह रिपोर्ट अब सामने आई है। ईओडब्ल्यू ने एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार से जुड़ी कंपनियों को भी क्लीन चिट दी है। रिपोर्ट में कहा है कि जब शरद पवार के पोते रोहित पवार ने कन्नड़ चीनी मिल खरीदी थी तो उनकी बारामती एग्रो आर्थिक रूप से मजबूत थी और पैसों की कोई हेरफेर नहीं की गई थी। वहीँ, उनकी पार्टी के सहयोगी व पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे को भी ईओडब्ल्यू से क्लीन चिट मिल गई है। इस मामले से संबंधित मुंबई पुलिस की मूल एफआईआर में अजित दादा और अन्य नेताओं को आरोपी बनाया गया था। मालूम हो कि अक्टूबर 2020 में जांच एजेंसी ने एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, तब राज्य में महाविकास अघाडी सत्ता (एमवीए) में थी। लेकिन दो साल बाद उद्धव ठाकरे की सरकार गिरने के बाद अक्टूबर 2022 में ईओडब्ल्यू ने कहा कि वह अपनी जांच जारी रखना चाहती है। 

शिखर बैंक घोटाला क्या है?

इस कथित घोटाले से बैंक को कुल 2 हजार 61 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आरोप है कि शिखर बैंक ने 15 साल पहले राज्य की 23 सहकारी चीनी मिलों को लोन दिया था। हालाँकि, ये फैक्ट्रियाँ घाटे के कारण डूब गईं। इसी बीच इन फैक्ट्रियों को कुछ नेताओं ने खरीद लिया। इसके बाद फिर शिखर बैंक की ओर से इन फैक्ट्रियों को लोन दिया गया। तब अजित पवार इस बैंक के निदेशक बोर्ड में थे। इस मामले में अजित दादा के साथ-साथ अमर सिंह पंडित, माणिकराव कोकाटे, शेखर निकम जैसे नेता भी आरोपी है। ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है।

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