चंडीगढ़, 9 अप्रैल : भाजपा में रहते हुए एक अरसे से बगावत का झंडा उठाए पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को घर वापसी कर ली। चौधरी बीरेंद्र सिंह के साथ उनकी पत्नी प्रेमलता भी कांग्रेस में शामिल हो गई। उधर भाजपा को भी अनुमान था कि हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले बीरेंद्र सिंह कांग्रेस में वापसी करेंगे। चौधरी बीरेंद्र सिंह ने दावा किया था कि उनके साथ दो विधायक भी कांग्रेस में शामिल होंगे। लेकिन मंगलवार को कांग्रेस में वापसी के वक्त उनके साथ कोई विधायक नही था। करीब एक महीने पहले बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह ने भारतीय जनता पार्टी छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ली थी। बृजेंद्र सिंह हिसार से निवर्तमान लोकसभा सदस्य हैं। साल 2019 में बृजेंद्र सिंह ने आईएएस की नौकरी छोड़कर सियासत में कदम रखा था।
बीरेंद्र सिंह के संबोधन से पहले ही लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर वह नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि पहले मेरे को बोल लेने दो, नहीं तो मैं भूल जाऊंगा। उन्होंने कहा कि आज यहां हरियाणा से ही नहीं, दिल्ली से भी हमारे कई साथी यहां आए हैं। भूपेंद्र हुड्डा हरियाणा में विपक्ष के नेता हीं नहीं, वह दस साल तक मुख्यमंत्री रहे हैं। वह मेरी बुआ का छोरा है। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि 52 साल हो गए हैं मुझे इस धंधे में। मैं अच्छा ज्योतिषी बन सकता हूं। मेरे हरियाणा के नेता एक दिन टाइम दे दो। मैं उस दिन एक डेढ़ लाख इकट्ठा कर दूंगा। इनका बोरिया बिस्तर गोल कर दूंगा। चौधरी बीरेंद्र सिंह पत्नी प्रेमलता के साथ कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। मुख्यालय में उनके साथ रणदीप सुरजेवाला भी मौजूद रहे। चौधरी बीरेंद्र सिंह पत्नी प्रेमलता के साथ कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। मुख्यालय में उनके साथ रणदीप सुरजेवाला भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बीजेपी हमारे लिए कहती है परिवारवाद, अब बहन, भाइयों को लेकर भी चलना परिवारवाद में आता है तो मैं क्या कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि भाजपा अपना एक भी बंदा नहीं बना पाई। कांग्रेस ने जो मुझे दिया है, वह कोई और दे नहीं सकता। उन्होंने किसान आंदोलन को लेकर कहा कि कुछ किसान भाई मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार से बात कराओ। किसानों ने कहा कि कम से कम वह बात तो करो, जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा करते हैं, एमएसपी की। उन्होंने मना कर दिया, फिर मैंने कहा कि कुछ और बताओ। मैंने कहा कि एमएसपी नहीं हो सकती तो कम से कम एक बैंच मार्क तो बना दो। उन्होंने कहा कि इस सरकार में किसानों को कुछ नहीं मिला। गरीबों को कुछ नहीं मिला। इस इंसाफ के लिए हमारा जो घोषणा पत्र आया है उसके अंदर एक-एक बिंदु को हमने देखा है। इस वास्तविकता से भाजपा कोसों दूर हैं। ये ग्लिसरीन लगाकर किसानों और गरीबों के लिए रोते हैं। बीरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रेमलता के कांग्रेस जॉइनिंग को लेकर हरियाणा भाजपा में भी हलचल शुरू हो गई है। चर्चा है कि हरियाणा भाजपा के 4 से 5 विधायक चौधरी बीरेंद्र सिंह के संपर्क में हैं। संभावना जताई है कि ये विधायक कांग्रेस जॉइन कर सकते हैं। चर्चा है कि जो विधायक नाराज हैं उन्हें आने वाले विधानसभा में टिकट देने का प्रलोभन दिया गया है। चंडीगढ़ में सीएम के डिनर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। सीएम नायब सैनी और पूर्व सीएम मनोहर लाल भी लगातार नाराज विधायकों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इस अवसर पर हिसार से उनके समर्थक उदयवीर पूनिया और विजय कोशिक भी उपस्थित थे।
किसान नेता सर छोटूराम के नाती हैं : बीरेंद्र सिंह
जाटों के दबदबे वाले जींद और इससे लगते एरिया को बांगर बेल्ट कहा जाता है और इस इलाके में किसानों के बड़े नेता रहे सर छोटूराम के नाती बीरेंद्र सिंह की मजबूत पकड़ रही है। बीरेंद्र सिंह के परिवार का हिसार इलाके में भी बड़ा जनाधार है। एक बार खुद बीरेंद्र सिंह तो 2019 में उनके बेटे इस सीट से सांसद रहे हैं। जींद की उचाना सीट से 5 बार विधायक और दो बार राज्यसभा और एक बार लोकसभा सांसद रह चुके बीरेंद्र सिंह 43 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद 2014 को लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे। कांग्रेस छोडऩे के पीछे की वजह उनके पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ मतभेद रहे, लेकिन अब हुड्डा और बीरेंद्र सिंह फिर से एक-दूसरे के काफी करीब हो गए हैं। चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपना पहला चुनाव उचाना से 1977 में लड़ा और वह बड़े मार्जिन से जीत हासिल करते हुए एमएलए बने। इसके बाद 1982 में फिर से वह उचाना से ही विधायक चुने गए। हालांकि बीरेंद्र सिंह चर्चा में उस वक्त आए जब उन्होंने हिसार लोकसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला को बड़े मार्जिन से हरा दिया था। ये ही वो वक्त था जब बीरेंद्र सिंह जींद से बाहर निकलकर हिसार तक अपनी छाप छोड़ चुके थे। इसके बाद बीरेंद्र सिंह 1991 में फिर से उचाना से विधायक बने और लगातार 2009 तक इस सीट पर विधायक रहे। हालांकि बीरेंद्र सिंह का सीएम बनने का सपना था, जो पूरा नहीं हो पाया। कभी सीएम नहीं बन पाने की टीस उन्हें हमेशा से रही। वह खुद अनेक बार अलग-अलग मंचों से इसका जिक्र भी करते रहे।

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