हिसार सांसद बृजेंद्र सिंह बीजेपी छोड़ हुए कांग्रेस में शामिल

नई दिल्ली, 10 मार्च : हिसार से सांसद बृजेंद्र सिंह ने भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि वह राजनीतिक वजहों से भाजपा छोड़ रहे हैं। दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के आवास पर कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे के बारे में भी बात की। हालांकि अभी उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कोई जानकारी नहीं आई है। बता दें कि सांसद बृजेंद्र सिंह किसान नेता सर छोटूराम के पडऩाती हैं। उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की मां भगवान देवी सर छोटूराम की बेटी थी। पिता-पुत्र लगातार हरियाणा में भाजपा को जजपा से गठबंधन तोडऩे की वकालत कर रहे थे। कांग्रेस जॉइनिंग के बाद बृजेंद्र सिंह ने कहा- मैं आज भाजपा से इस्तीफा देकर कांग्रेस ज्वाइन कर रहा हूं। मैं पार्टी के पूरे नेतृत्व को आभार व्यक्त करता हूं। इसके साथ साथ मैं ये जरूर करना चाहूंगा कि कुछ राजनीतिक ऐसे कारण थे, जिसके कारण मुझे ये निर्णय लेना पड़ा। किसानों के कुछ ऐसे मुद्दे थे, जिसको लेकर में भाजपा में असहज था। मजबूरी में मुझे ये फैसला लेना पड़ा।

जजपा का रास्ता साफ

बृजेंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद भाजपा की हरियाणा में सरकार की सहयोगी जजपा का रास्ता अब साफ हो गया है। सूत्रों के मुताबिक अब भाजपा हरियाणा में गठबंधन की सहयोगी जजपा को एक लोकसभा सीट दे सकती है। संभावना है कि हिसार लोकसभा सीट से जजपा डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को उम्मीदवार बनाया जाए। हालांकि जजपा के नेता अभी तक गठबंधन को लेकर संशय में हैं, इसकी वजह यह है कि अभी तक भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए गए हैं।

चंडीगढ़ से एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार… बृजेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर

मई, 2019 लोकसभा आम चुनावों में बृजेन्द्र ने हिसार संसदीय सीट पर हुए मतदान में कुल पड़े 11 लाख 80 हज़ार वोटो से 6 लाख 3 हज़ार 289 वोट अर्थात 51.04 त्न वोट प्राप्त कर विजयी हुए थे, जबकि प्रदेश के वर्तमान उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जिन्होंने तब जजपा के टिकट पर यहाँ से चुनाव लड़ा था, वह केवल 2 लाख 89 हज़ार 221 वोट अर्थात 24.47 प्रतिशत वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस के भव्य बिश्नोई, जो पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के पौत्र और कुलदीप बिश्नोई के सुपुत्र है, एवं जिन्होंने  नवम्बर, 2022 में कुलदीप के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद विधायक पद से  त्यागपत्र देने के बाद रिक्त हुई हिसार जिले की आदमपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और जीता, वह मई, 2019  में हिसार संसदीय सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर केवल 15.6 प्रतिशत वोट अर्थात 1 लाख 84 हज़ार 369 वोट ही प्राप्त कर पाए  एवं इस कारण निर्धारित संख्या  से कम वोट मिलने के कारण भव्य की ज़मानत राशि भी जब्त हो गयी थी। उस चुनाव में कुल 26 उम्मीदवार थे जिसमें बृजेन्द्र और दुष्यंत को छोड़ शेष सभी की ज़मानत राशि जब्त हो गयी थी। नोटा विकल्प को 2957 वोट पड़े थे। इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने आज कि चुनावी मैदान से उतरने से पूर्व बृजेन्द्र हरियाणा कैडर के 1998 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी थे एवं उन्होंने अप्रैल,2019 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। दस वर्ष पूर्व अप्रैल, 2014 लोकसभा आम चुनाव में दुष्यंत चौटाला इस सीट से सबसे कम आयु के लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए थे जब उन्होंने हजका से चुनाव लड़ रहे कुलदीप बिश्नोई और  कांग्रेस के उम्मीदवार संपत सिंह को पराजित किया था।

हेमंत ने बताया कि वर्ष 1984 में बृजेन्द्र के पिता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की टिकट पर हिसार से लोकसभा चुनाव जीता था। हालांकि इस बात की बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि उस चुनाव में बीरेंद्र सिंह से लोकदल से चुनाव लड़ रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को 50 हजार वोटों से अधिक अंतर से हराया था। 

ज्ञात रहे कि नवंबर, 2014 में पहली मोदी सरकार दौरान कांग्रेस में 42 वर्ष रहने के बाद भाजपा में चले गए। बीरेंद्र  सिंह को पार्टी ने हरियाणा से राज्यसभा सांसद निर्वाचित करवाकर हालांकि केंद्र सरकार में कैबिनेट रैंक का मंत्री बनाकर ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय दिया गया एवं वर्ष 2016 में उन्हें  इस्पात (स्टील) मंत्रालय दे दिया गया था। अप्रैल, 2019 में उनके सुपुत्र बृजेन्द्र को हिसार सीट से भाजपा टिकट दिए जाने के बाद बीरेंद्र ने केंद्रीय मंत्रीपद से त्यागपत्र दे दिया था एवं कुछ माह बाद  राज्यसभा से भी त्यागपत्र दे दिया था।

बहरहाल, हेमंत ने आगे बताया कि हिसार संसदीय सीट से अब तक सबसे अधिक तीन बार सांसद बनने का रिकॉर्ड जयप्रकाश (जेपी ) के नाम है हालांकि वह 1989 में देवीलाल की जनता दल, 1996 में बंसी लाल की हरियाणा विकास पार्टी और 2004 में कांग्रेस के टिकट पर जीत कर सांसद बने थे। नवम्बर, 2022 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जय प्रकाश हालांकि आदमपुर उपचुनाव में भाजपा के भव्य बिश्नोई से हार गये थे। जे.पी. छ: माह के लिए 1990 में केंद्र की चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय में उप मंत्री भी रहे थे। जे.पी. ने 1989 में बीरेन्द्र सिंह को हराया था हालांकि 1991 लोकसभा उपचुनाव में जे.पी. कांग्रेस के नारायण सिंह से हार गए थे. लिखने योग्य है कि जे.पी. के बाद गत 34 वर्षो में  हिसार लोकसभा सीट से निर्वाचित  सांसद को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में स्थान प्राप्त नहीं हो सका है।

बहरहाल, हिसार सीट दो बार सांसद बनाने का मौका  मणि राम बागड़ी को वर्ष 1962 और 1980 जबकि इनेलो के सुरेंद्र सिंह बरवाला को 1998 और 1999 में मिला। वर्ष 2009 में भजन लाल यहाँ से हरियाणा जनहित कांग्रेस से जीत कर सांसद बने परन्तु 2011 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र कुलदीप बिश्नोई ने हजका के टिकट पर ही यहाँ से जीत हासिल की।

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