ज्यादा मोबाइल के उपयोग से मानसिक तनाव का खतरा : नरेश जागलानकार्यशाला आयोजित कर पाठकों को मोबाइल के सदुपयोग बारे जागरूकहिसार, 13 जनवरी।

जिला पुस्तकालय में शनिवार को मोबाइल एडिक्शन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।  
कार्यशाला में काउंसलर नरेश जागलान ने कहा कि मोबाइल के अधिक उपयोग करने से आंखों, गर्दन एवं हाथ में दर्द होने की शिकायतें शुरू हो जाती है। मोबाइल की लत के कारण नींद ना आना, तनाव, मन की शांति भंग, चिड़चिड़ा स्वभाव और वाइब्रेशन से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर अभिभावक अपने बच्चों के साथ एक मित्र के रूप में व्यवहार कर बच्चों को मोबाइल से होने वाले दुष्प्रभावों से बचा सकते हंै। पुस्तकालय इस विषय में बड़ा मददगार साबित हो सकता है, जिससे की बच्चे में स्वाध्याय की भावना को जागृत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकासवादी भौतिक युग में मनुष्य अपने जीवन का दैनिक कार्यों को सरल बनाने के लिए जीवन उपयोगी अनेक वस्तुओं का त्याग कर चुका है, जिसमें अलार्म, घड़ी, टॉर्च, कैलकुलेटर, पॉकेट, डायरी आदि का पुन प्रयोग करना चाहिए और अपनी छोटी-छोटी जरूरत के लिए मोबाइल के प्रयोग से बचना चाहिए।  हमें प्रतिदिन कम से कम रात्रि काल में 8 घंटे मोबाइल को स्विच आफ या फ्लाइट मोड में अवश्य करना चाहिए। मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग ने हमारे जीवन की स्वतंत्रता छीन ली है।  
उन्होंने बताया की सोशल मीडिया का उपयोग एक सीमित समय तक कर मोबाइल से होने वाले दुष्प्रभावों से हम खुद को बचा सकते हैं। एक व्यक्ति अपने जीवन काल में औसतन 20 हजार घंटे मोबाइल के उपयोग में लगता है, जबकि एक प्रोफेशन में निपुण होने के लिए मात्र 10 हजार घंटो की आवश्यकता होती है तो क्यों न हम अपने बहुमूल्य समय को अपने निर्धारित लक्ष्य की और लगाकर अपने अभिभावकों का सिर गर्व से ऊंचा करने के साथ-साथ समाज के कल्याण में अपनी अहम भूमिका अदा करें। कार्यशाला में डॉ राजेंद्र सेवदा, डा अनिल यादव, सुरेंद्र चौहान, डा आत्माराम ने भी अपने विचार सांझा कर मोबाइल के सदुपयोग करने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर विनोद कुमार, डॉ राजेंद्र पुनिया, रिसाल सिंह, गीतू, हेमंत कुमार, विकास आदि उपस्थित रहे।

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