हिसार, 8 मार्च : श्री जयभगवान सैनी ने भिन्न-भिन्न विभागों में नौकरी की और अंत में औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग से प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत हुए। सेवानिवृत्ति के बाद इन्होंने साहित्य द्वारा देश और समाज की सेवा करने की ओर कदम बढ़ाया है। अब तक इनकी पांच यात्रा-संस्मरण क्रमश: श्री अमरनाथ धाम एवं गंगा मैया, डगर-डगर, नगर-नगर, रास्तों में रास्ते, वे सुनहरे पल और चलें धामों की ओर तथा चार कविता-संग्रह क्रमश : उम्मीद, फलों का फल सब्जीनामा, धरोहर की पाती और छह लघुकविता संग्रह क्रमश: लुप्त-विलुप्त (हरियाणा, मन की गंगोत्री, स्मृति शेष अतीत के झरोखे और एक बै अमराई मैं (हरियाणा, अनुवादित) पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं। श्री जय भगवान सैनी ने लोकार्पित पुस्तक ‘चलेंं धामों की ओरÓ के बारे में बताया कि इस पुस्तक में सभी बड़े धामों और छोटे धामों अर्थात सात धामों की यात्रा का वर्णन किया गया है। अत: यह पुस्तक इन धामों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के पथ प्रदर्शक का काम करेगी। श्री जयभगवान सैनी के इस साहित्यिक कार्य से प्रसन्न होकर देश के भिन्न-भिन्न राज्यों के राज्यपालों द्वारा शुभकामना संदेश भेजे गए हैं और इनको हरियाणा की भिन्न-भिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इस पुस्तक के लोकार्पण के समय पाठकपक्ष संध्या दैनिक के कार्यालय में सर्वश्री देवेंद्र उप्पल, वरिष्ठ पत्रकार राजेश चुघ व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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