हिसार, 16 अप्रैल : भाजपा का 2024 के चुनाव में मोदी की गारंटी नमक दस्तावेज किसानों के लिए खतरे की घंटी है। आने वाले चुनाव के पहले चरण से मात्र चार दिन पहले जारी हुआ भारतीय जनता पार्टी का यह घोषणा पत्र किसानों के लिए खुली घोषणा है कि अगर भाजपा तीसरी बार सत्ता में आती है तो खेती और किसानों के लिए कोई उम्मीद नहीं होगी। आमतौर पर घोषणा पत्र में राजनैतिक दल अपनी ओर से जनता के हित में बढ़ चढ़कर दावे और वायदे करते हैं। इस बार भाजपा ने घोषणा पत्र में किसी भी वर्ग के लिए कोई भी ऐसी घोषणा नहीं की, जिसके चलते देश की जनता भारतीय जनता पार्टी की ओर आकर्षित हो। पिछले कुछ वर्षों से किसान लगातार अपनी मांगों के लिए समय-समय पर आंदोलन करते रहे हैं। आंदोलन के दौरान दिल्ली के तमाम बॉर्डर पर लंबे समय तक किसान अपनी मांगों के लिए धरने पर बैठे रहे और उस किसान आंदोलन के दौरान 800 किसानों की शहादत के बाद सरकार ने किसानों के साथ समझौता करते हुए तीन काले कानून वापस लेने की घोषणा के साथ-साथ किसानों की अनेक मांगों को पुरा करने का वादा किया था। लेकिन अपने घोषणा पत्र में किसानों के तमाम मुद्दों और किसान आंदोलन की सभी मांगों पर भाजपा की चुप्पी से जाहिर होता है कि या तो किसान आंदोलन के हाथों हुआ अपमान मोदी जी आज तक भूल नहीं है पाए है या फिर भाजपा को भरोसा है कि किसान का वोट लेने के लिए खेती और किसान के बारे में कुछ भी कहने या करने की कोई जरूरत नहीं है। आंकड़े यह बताते हैं कि फसल बीमा योजना का लाभ उठाने वाले किसानों की संख्या लगातार कम हुई है, जबकि बीमा कंपनियों का मुनाफा लगातार बढ़ता गया है, इसलिए मोदी की गारंटी पूरी तरह से किसानों के साथ धोखा के अलावा कुछ भी नहीं है देश के किसानों के हित पूर्ण रूप से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के हाथों में सुरक्षित हैं।
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